सोलर वाटर हीटर होता क्या है

सोलर वाटर हीटर होता क्या है

सोलर वाटर हीटर होता क्या है सोलर वाटर हीटर एक ऐसा उपकरण है जो सूरज की रोशनी से जो ऊर्जा मिलती है उसे heat के फॉर्म में कन्वर्ट कर देता है यानी कि जो सोलर एनर्जी से पानी गर्म करता है ऐसा यह इक्विपमेंट सोलर वाटर हीटर है. सोलर वाटर हीटर के दो प्रचलित टाइप होते हैं एक है फ्लैट प्लेट कलेक्टर (Flat plate collector) सोलर वाटर हीटर और दूसरा है इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर (Evacuated tube collector ) सोलर वाटर हीटर .

क्या सोलर वाटर हीटर सिलेक्ट करते समय पानी की hardness चेक करनी पड़ती है.पानी के हाडनेस क्या रोल प्ले करती है तो उसका सिंपल सा उत्तर है कि hardness को चेक जरूर करना है उसका कारण यह है कि पानी जितना हार्ड होगा उसमें उतने ज्यादा मिनरल्स और केमिकल उपस्थित रहेंगे जो पानी गर्म होने के बाद उसके स्केल निकल जाएंगे अगर आपने देखा होगा आपके बाथरूम की फिटिंग पर या नलो पर सफेद परत आ जाती है उसको उस को स्केलिंग बोलते हैं तो पानी जितना ज्यादा हार्ड होगा उतनी ज्यादा स्केलिंग होगी उतने ज्यादा डिपॉजिट होगे और वह डिपॉजिट क्या करते हैं बेसिकली आप के टैंक की लाइफ को कम करते हैं.

कैसे करते हैं और डिपाजिट जाकर आपके टैंक के अन्दर चिपक जाते हैं और फिर वहां पर करोजन शुरू होता है जिसकी वजह से आप के टैंक में लीकज होनी शुरू हो जाती है इसलिए सोलर वाटर हीटर सिलेक्ट करके समय हाडनेस चेक करना बहुत ज्यादा जरूरी है.

सोलर वॉटर हीटर लगाने के लिए जगह

अब सोलर वॉटर हीटर अगर आप को इंस्टॉल करना है तो उसके लिए जगह कितनी लगती है और उसका वजन कितना आएगा तो अब मान के चलिए की एक सौ लीटर का अगर सिस्टम आप को इंस्टॉल करना है तो आप फ्लैटलेट कलेक्टर का लोगे तो आपको कम से कम सवा दो स्क्वेयर मीटर जगह लगेगी और उसका वजन लगभग डेढ़ सौ किलो तक आ जाएगा.
अगर आप इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर बेस्ड सिस्टम की बात करें तो उसको भी लगभग 2 स्क्वायर मीटर जगह लगेगी और उसका भी वजन 150 से 160 किलो तक आ जाएगा . तो आप मन कर चलिए कि डेढ़ सौ किलो में आपका सिस्टम आराम से आ जाएगा और आपको जगह 2 से 2 स्क्वेयर मीटर लगेगी . मतलब 20 से 25 स्क्वायर फीट जगह आप को चाहिए और यह जो वजन होगा सिस्टम का यह पॉइंट लोड नहीं होगा यह पूरे एरिया पर डिसटीब्यूट हो जाएगा .

सोलर वॉटर हिटर के प्रकार

आपको अभी सोलर वॉटर हिटर के अंदर दो बेसिक टाइप्स बताएं , एक तो एक ऍफ़टीसी और एक ईटीसी . इसके और टाइप्स होते हैं तो इसमें पहला होता है कि सिस्टम आपका प्रेशरराइज है या नॉन प्रेशर मतलब आपका जो ठंडे पानी का सप्लाई है वह अगर non-pressure है तो non-pressure वाला सिस्टम लगेगा अगर प्रेशर है तो प्रेशर वाला सिस्टम लगेगा.
उसमें और अगर आप सब क्लासिफाई करने जाओगे तो आपको उसमें टाइप आएंगे किए डायरेक्ट हीटिंग है या इन-डायरेक्ट हीटिंग है इसका मतलब है कि इस सिस्टम में हीट एक्सचेंजर का उपयोग किया गया है या नहीं किया गया.
हिट एक्सचेंजर नॉर्मल वहां पर यूज होता है जहां पर पानी बहुत हार्ड है या बहुत खराब है या फिर जहां पर टेंपरेचर 4 डिग्री से कम रहता है.

तो यह और सब क्लासिफिकेशन हो गया इसके बाद ऑपरेटिंग प्रिंसिपल के हिसाब से भी इसको क्लासिफाइड किया जाता है कि आपका सिस्टम नेचुरल थर्मोसायफन सिस्टम है या फ़ोर्स सरकुलेशन सिस्टम है .

नेचुरल थर्मोसायफन – नेचुरल थर्मोसायफन का मतलब यह होता है कि पानी जब गर्म होने लगता है तो उसकी डेंसिटी चेंज होती है. डेंसिटी चेंज होने की वजह से जो गर्म वाला पानी है वह ठंडे पानी से हल्का हो जाता है और वह ऊपर ऊपर उठने लगता है और इसी वजह से सिस्टम में सरकुलेशन पैटर्न सेटअप हो जाता है. उसको नेशनल थर्मोसायफन बोलते हैं.

फ़ोर्स सरकुलेशन सिस्टम – दूसरा टाइप होता है फ़ोर्स सरकुलेशन सिस्टम इस में क्या होता है कि यह जो सरकुलेशन है यह वाटर पंप इस्तेमाल करके करते है. इससे फायदा यह होता है कि सिस्टम आपका ज्यादा एफिशिएंटली काम करता है और ज्यादा रेगुलरली काम करता है .

सोलर वाटर हीटर से पानी कितना गर्म हो सकता है

सोलर वाटर हीटर का कितना टेंपरेचर तक पानी गर्म कर सकते है यह basically बहुत से फैक्टर पर डिपेंड करता है. जैसे कि आपका कलेक्टर का टाइप कौन सा है फ्लैट प्लेट कलेक्टर है या इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर है नाचूरल थर्मोसायफन सिस्टम है या फ़ोर्स सरकुलेशन सिस्टम है नॉर्मली क्या होता है कि जो घरेलू एप्लीकेशन रहते हैं जैसे कि नहाना, बर्तन मांजने, कपड़े धोना इसके लिए आप को ज्यादा से ज्यादा 60 डिग्री टेंपरेचर लगता है तो इस केस में कौन सा भी आप सिस्टम सिलेक्ट कर लो ईटीसी सेलेक्ट कर लो यह ऍफ़टीसी सिलेक्ट कर लो आपको 60 डिग्री का तापमान मिल जाएगा.

बाकी जगह पर जहां पर कमर्शियल एप्लीकेशंस है इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस है वहां पर जो टेंपरेचर की जरूरत होती है उस हिसाब से आपको कलेक्टर टाइप सिलेक्ट करना पड़ता है. अगर आप कलेक्टर के मैक्सिमम टेंपरेचर की बात करो तो फ्लैट प्लेट कलेक्टर्स नॉर्मली 75 डिग्री टेंपरेचर तक आपको काम आ सकता. 75 डिग्री सेंटीग्रेड के ऊपर उसका एफिशिएंसी बहुत ही कम हो जाता है अगर आप इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर की बात करो तो वह नॉर्मल ही जहां पर ज्यादा टेंपरेचर आउटपुट लगता है वहां पर उपयोग किया जाता है .ताकि आपको 100 डिग्री तक भी गर्म पानी मिल सके है.

FPC और ETC में कौन सा अच्छा है

फ्लैट प्लेट कलेक्टर ज्यादा अच्छा है कि वे इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर ज्यादा अच्छा है.इसको कंपेयर करने की बहुत से परामीटर होता है आपके एप्लीकेशन के हिसाब से आपको सिलेक्ट करना है कि आपको कौन सा कलेक्टर का उपयोग करना है अगर आप देखोगे कि आपके यहां पर बर्फ नहीं पड़ती या फिर 4 डिग्री के नीचे टेंपरेचर नहीं जाता है और अगर आपको गर्म पानी 60-65 डिग्री तक गर्म करना है तो आपके लिए दोनों फ्लैट प्लेट कलेक्टर और इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर लगभग एक जैसा काम करेंगे .

अगर आपके यंहा का टेंपरेचर 4 डिग्री से नीचे जाता है तो आपको इवेपरेटेड ट्यूब कलेक्टर ज्यादा बेहतर परफॉर्म देगा क्योंकि उस में हानि कम होती हैं. अगर आपको higher टेंपरेचर आउटपुट चाहिए मतलब आपको 85 डिग्री सेंटीग्रेड के ऊपर का पानी गर्म पानी चाहिए तो वहां पर भी ईटीसी बेहतर परफॉर्म करेगा. लेकिन अगर आप को 60-65 डिग्री तक 70 – 75 डिग्री तक का गर्म पानी चाहिए तो फिर दोनों कलेक्टर आपको एक जैसी परफॉरमेंस देंगे.

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