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ब्राइन चिलर क्या है और यह कैसे काम करता है

ब्राइन चिलर क्या है और यह कैसे काम करता है

हमारे घर में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण जैसे कि फ्रिज एयर कंडीशनर वाटर कूलर इत्यादि पानी या हवा को ठंडा करने के लिए किसी न किसी प्रकार के रेफ्रिजरेंट का इस्तेमाल करते हैं. एयर कंडीशनर में रेफ्रिजरेंट के रूप में हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (एचसीएफसी), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) का इस्तेमाल किया जाता है इसी प्रकार ब्राइन भी एक तरह का रेफ्रिजरेंट है.

ब्राइन पानी में आमतौर पर सोडियम क्लोराइड का एक गोल है. इसका इस्तेमाल गर्मी (Heat) को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता है. इसका इस्तेमाल रेफ्रिजरेशन में बहुत ज्यादा किया जाता है. इसका Freezing point पानी के फ्रीजिंग पॉइंट से कम होता है. और इसे 0°C से नीचे ठंडा किया जा सकता है. इसलिए पानी के बजाय कुलेंट के लिए इसका इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है. और यह ज्यादा प्रभावी है. ब्राइन -21°C पर जम जाता है. इसका इस्तेमाल स्टील और कुछ अन्य धातुओं को ठंडा करने के लिए किया जाता है.

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सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट

सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट साधारणतया तरल पदार्थ होते हैं और इनका इस्तेमाल पदार्थ से हीट एक्सचेंजर में हीट भेजने के लिए किया जाता है. जहां प्राइमरी रेफ्रिजरेंट हीट Absorb कर लेता है. एयर कंडीशनिंग सिस्टम में यह कहा जा सकता है. कि हवा सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट का काम करती है. इन तरल पदार्थों को प्राइमरी रेफ्रिजरेंट ठंडा करने का काम करता है. तब यह किसी तरह से स्रोत के संपर्क में आ जाते हैं जो इन्हें sensibly heated करता है. इस प्रकार से यह ऊर्जा अवशोषित होती है. गर्म तरल वापिस चिल्लर में पहुंच जाता है. जहां हिट को प्राइमरी रेफ्रिजरेंट में भेज दिया जाता है

एयर कंडीशनिंग ठंडे पानी को सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट के रूप में इस्तेमाल करते हैं. जबकि कम तापमान के लिए ब्राइन , ग्लाइकोल्स और तेल का इस्तेमाल करते हैं बड़े रेफ्रिजरेशन प्लांट कूलिंग क्षमता को प्लांट रूम से इस्तेमाल करने के स्थान तक ले जाने के लिए अक्सर सेकेंडरी रेफ्रिजरेंटस का इस्तेमाल करते हैं.

सेकेंडरी रेफ्रिजरेंटस के उपयोग से लाभ

  • प्राइमरी रेफ्रिजरेंट के इस्तेमाल की मात्रा कम किया जा सकता है.
  • प्राइमरी रेफ्रिजरेंट प्लांट में विशेषज्ञों के देखरेख में रहता है
  • वेपर कंप्रेशन साइकिल में pressure losses कम से कम होता है. जैसे cycle efficiency बढ़ती है
  • खतरनाक प्राइमरी रेफ्रिजरेंटस एयर कंडीशनिंग या फूड रेफ्रिजरेशन जैसे उपकरणों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं
  • ब्रेक डाउन प्राइमरी सिस्टम में दिक्कत आने पर मरम्मत की जा सकती है. जबकि सेकेंडरी कुलिंग क्षमता बनी रहती है

सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट के उपयोग की हानियां

  • जब सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट में हीट Absorb होती है. तो तरल पदार्थ Sensibly Heat न की Latent Heat Absorb होती है. जो की किसी उपकरण द्वारा उबलने की प्रक्रिया में होता है. इसके  कारण हिट एक्सचेंजर की पूरी लंबाई में तरल पदार्थ का तापमान सामान्य रूप में बढ़ता है. इसके कारण हिट एक्सचेंज उपकरण के लिए ज्यादा बड़े कूलर की आवश्यकता होगी जो इसे ठंडा रख सके
  • प्राइमरी तरल पदार्थ के बजाय सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट का Mass flow Rate कम होता है, क्योंकि तरल पदार्थ की vapourisation की latent heat के बजाय Specific heat capacity कम होती है.

सेकेंडरी रेफ्रिजरेंटस के फायदे

एक बढ़िया सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट के काफी फायदे होते हैं जैसे कि

  • सस्ता
  • अच्छी गर्मी हस्तांतरण विशेषताएं
  • कम विस्कोसिटी
  • रासायनिक रूप से स्थिर
  • उच्च विशिष्ट ऊष्मा
  • नॉन करोसिव

पानी एक ऐसा रेफ्रिजरेंट है जो कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ 0°C से ऊपर एयर कंडीशनिंग के उपकरणों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. क्योंकि 0°C से नीचे पानी जमुना शुरू हो जाता है इसीलिए इसे एक निर्धारित सीमा तक है इस्तेमाल किया जा सकता है. और तापमान ज्यादा होने पर पानी पिघल जाता है इसके लिए पानी में नमक मिलाकर इसका इस्तेमाल ब्राइन बनाकर किया जाता है यह मुख्यतः चार भागों में बांटा गया है.

  1. नमक आधारित ब्राइन,आमतौर पर कैल्शियम या सोडियम क्लोराइड का पानी में घोल
  2. ग्लाइकोल आधारित ब्राइन आमतौर पर एथिलीन या प्रोपलीन ग्लाइकोल का पानी में घोल
  3. कम तापमान हिट हस्तांतरण के लिए ब्राइन के लिए शुद्ध पदार्थ जैसे मिथलिन क्लोराइड, ट्राईक्लोरोइथलिन, RII , एसीटोन , मिथाइल या इथाइल अल्कोहल
  4. उपलब्धता के कारण विशेष्य असामान्य अनुप्रयोगों के लिए जैसे चरन तापमान रेंज , प्रयोगात्मक उपयोग आदि के लिए ब्राइन विशिष्ट उदाहरण है. पेट्रोलियम उत्पाद, सिंथेटिक तेल, एक सिलिकॉन तरल पदार्थ या चीनी ब्राइन

पानी में कोई और दूसरा घुलनशील पदार्थ मिलाने पर इसका हिमांक ( फ्रीजिंग पॉइंट ) कम हो जाता है यानी कि फिर पानी 0°C पर नहीं जमता. फिर इसका फ्रीजिंग पॉइंट इसमें मिलाया गया पदार्थ पर निर्भर करेगी.जैसे कि

  • सोडियम क्लोराइड ब्राइन = -21°C
  • कैल्शियम क्लोराइड ब्राइन =51°C

इस प्रकार पानी में अन्य घुलनशील पदार्थ मिलाकर इसके फ्रीजिंग पॉइंट को और कम किया जा सकता है. कैल्शियम क्लोराइड औद्योगिक और मरीन रेफ्रिजरेशन सिस्टम में प्रयोग होने वाला सबसे आम सेकेंडरी रेफ्रिजरेंट है.इस पोस्ट में आपको ब्राइन के बारे में बताया गया है. ब्राइन क्या होता है और इसका इस्तेमाल कहां पर किया जाता है अगर इसके बारे में आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करें और अगर आपको यह जानकारी पसंद आए तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.

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